श्री श्री दया माता के ब्रह्मलीन होने के समाचार का मीडिया प्रसारण

30 नवम्बर, 2010 को योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया/सेल्फ़ रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप की संघमाता एवं अध्यक्षा, श्री श्री दया माता, के ब्रह्मलीन हो जाने का समाचार विश्व के प्रमुख समाचार संगठनों द्वारा किये गये व्यापक प्रेस प्रकाशन-प्रसारण के फलस्वरूप समूचे विश्व में हज़ारों व्यक्तियों तक पहुँच सका। सभी ने उनके उदाहरणीय जीवन को श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसमें श्री श्री दया माता के गुण, जैसे उनकी विनम्रता, दूसरों के प्रति उनकी एकनिष्ठ सेवा, तथा दिव्य करुणा, चर्चा के प्रमुख विषय रहे।

“एक मार्गदर्शक प्रकाश…” —न्यू यॉर्क टाइम्स

“योगानन्दजी की शिक्षाओं का सच्चा उदाहरण…” —लॉस एन्जिलिस टाइम्स

न्यू यॉर्क टाइम्स, लॉस एन्जिलिस टाइम्स, फ़ोर्स, AARP, दि ओरिगोनियन, मिनिएपोलिस स्टार ट्रिब्यून, फ़िलेडॅल्फ़िया इन्क्वायरर, कैन्सस सिटी स्टार, सॉल्ट लेक ट्रिब्यून, सॅन डियेगो यूनियन ट्रिब्यून, सेन्ट पीटर्सबर्ग टाइम्स, तथा, एसोसिएटेड प्रेस उन अनेक ऑनलाइन समाचार तथा समाचार-पत्र संगठनों और वायरों में से केवल कुछ ही नाम हैं जिन्होंने श्री श्री दया माता के देहावसान की ख़बर प्रकाशित की।

लॉस एन्जिलिस टाइम्स द्वारा दया माताजी पर छापे गये आलेख को अमेरिका के सभी अखबारों ने प्रकाशित किया। इसमें विख्यात धर्म-शास्त्र विद्वान श्री जे. गॉर्डन मेल्टन, जो इन्स्टिट्यूट फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ अमेरिकन रिलिजॅन (Institute for the Study of American Religion) के निदेशक तथा एन्सायक्लोपीडिया ऑफ़ अमेरिकन रिलिजॅन्स (Encyclopedia of American Religions) के लेखक भी हैं, ने कहा, “दया माताजी ने खुद की ख्याति करने की अपेक्षा अपने गुरु की ख्याति करने में अपना समय व्यतीत किया” —दया माताजी की विनम्रता तथा मानवजाति के प्रति उनकी एकनिष्ठ सेवा पर एक प्रबल साक्ष्य-वचन।

“एक प्रेरणास्रोत… जिसने अनेकों के जीवन को स्पर्श किया।” —हिन्दू धर्म के प्रवक्ता, श्री राजन ज़ैद

अमेरिका तथा अन्य देशों में भारत के समाचार पत्रों एवं ऑनलाइन समाचार सूत्रों ने दया माताजी पर आलेख प्रकाशित किये। इनमें टाइम्स ऑफ़ इण्डिया से लेकर इण्डिया वेस्ट तथा DailyIndia.com जैसे समाचार संगठन शामिल थे। DailyIndia.com ने हिन्दू धर्म के विख्यात प्रवक्ता श्री राजन जै़द द्वारा दया माताजी को दी गयी श्रद्धांजलि को इस प्रकार प्रकाशित किया: “एक प्रेरणास्रोत एवं दिव्य प्रेम से परिपूर्ण आत्मा जिसने आध्यात्मिक पथ पर अनेकों के जीवन को स्पर्श किया।”

एल ए योगा, हॉराइज़न्स मैगज़ीन, प्राणा जर्नल, इन्टीग्रल योगा मैगज़ीन, तथा विज्डम क्वार्टर्ली: अमेरिकन बुद्धिस्ट जर्नल सरीखी अध्यात्म को समर्पित पत्र-पत्रिकायें उन प्रकाशनों में से हैं जिन्होंने योगदा सत्संग सोसाइटी/सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप की दीर्घकालिक अध्यक्षा को श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यात्म एवं योग के प्रति समर्पित अनेक पत्रिकाओं द्वारा उनके आगामी संस्करणों में दया माताजी पर और भी आलेख प्रकाशित किये जाने की योजना है।

अमेरिका के नेशनल पब्लिक रेडियो के KPCC-FM (लॉस एन्जिलिस) ने श्री श्री दया माता के जीवन एवं सफलताओं पर स्वामी चिदानन्द का इन्टरव्यू लिया, तथा अपनी वेबसाइट पर उक्त इन्टरव्यू की ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रसारित की, और साथ-ही-साथ प्रेस द्वारा प्रकाशित समाचार के सारांश एवं अलग से लिये गये वीडियो इन्टरव्यू का भी प्रसारण किया। KPCC की संवाददाता सुश्री शर्ली जहद ने कहा कि दया माताजी “उस प्रकार की ख्याति से दूर रहने के लिये उल्लेखनीय थीं जिसकी चाह अनेक आध्यात्मिक प्रमुखों को होती है।” उक्त रेडियो प्रसारण में क्रिस्टोफ़र चैपल, लॉयोला मॅरिमाउण्ट यूनिवर्सिटी (Loyola Marymount University) में इण्डिक ऍण्ड कम्पॅरिटिव थियोलॉजी (Indic and Comparative Theology) के प्रोफेसर का इण्टरव्यू भी शामिल था जिसमें उन्होंने कहा कि दया माताजी “उन व्यक्तियों के लिये एक प्रेरणा के रूप में याद की जायेंगी जो अपना जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित करना चाहते हैं।”

“एक विलक्षण महिला जिसने दूसरों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया…” —ट्विटर पोस्ट (Twitter post)

इस ऐतिहासिक घटना का समाचार वेबसाइट, ब्लॉग (blogs), ऑनलाइन फ़ोरम (online forums), और अन्य मीडिया नेटवर्कों द्वारा व्यापक रूप से प्रकाशित किया और Triumph of the Spirit, Open to Healing, BellaOnline,  Beliefnet.com जैसी वेबसाइटों ने दया माताजी को भावभीनी श्रद्धांजलियाँ भी अर्पित की।

वेदिक मैथ्स फ़ोरम (Vedic Maths Forum) के भेजे एक दिलचस्प ब्लॉग-सन्देश ने पुरी के शंकराचार्य जगद्गुरु श्री भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा किये गये अमेरिका के ऐतिहासिक भ्रमण में दया माताजी की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। (शंकराचार्य की अनेक विलक्षण उपलब्धियों में प्राचीन भारत के ग्रन्थों में दिये गये उन्नत गणितशास्त्र की व्याख्या पर एक पुस्तक भी शामिल है।)

ट्विटर वेबसाइट [Twitter.com] पर सैकड़ों सन्देश भेजे गये, जिसमें मीडिया द्वारा किये गये प्रकाशनों के ब्यौरे एवं स्मृति सभाओं के सविस्तार विवरण भी शामिल थे। ऑनलाइन समाचार समूहों ने अनेक मीडिया सूत्रों में प्रकाशित इन सभाओं के समाचार लोगों तक पहुँचाये। तथा संस्था के सदस्यों, मित्रों, एवं विश्व भर में योगदा सत्संग सोसाइटी/सेल्फ़ रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप के ध्यान केन्द्रों द्वारा फ़ेसबुक (Facebook) पर बनाये गये समूहों ने हमारी प्रिय संघमाता को “ एक महान् दिव्य माँ ” कहकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

सबसे हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलियों में से एक थी सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप के समीप रहने वाले माउण्ट वॉशिंग्टन के एक ऐसे निवासी की जो संस्था के सदस्य नहीं हैं और जिन्हें श्री दया माताजी से भेंट करने का अवसर कभी प्राप्त नहीं हुआ, किन्तु निश्चित रूप से उन्हें दया माताजी के स्पन्दनों ने अभिभूत किया। लेखक श्री बी. जे. गॅलाघर ने द हफिंग्टन पोस्ट में प्रकाशित अपने आलेख में लिखा:

किसी विद्वान ने कभी कहा था, “जब आपका कार्य स्वतः बोलने लगे तो आपको कुछ कहने की आवश्यकता नहीं।” दया माताजी के जीवन के विषय में यह सटीक प्रतीत होता है, जिन्होंने गत पचपन वर्षों से सेल्फ़-रियलाइजे़शन फ़ेलोशिप/योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया का नेतृत्व किया।….

हाल ही में दया माताजी के देहावसान के बाद लॉस एन्जिलिस टाइम्स में उनके जीवन के बारे में पढ़ने से पहले मैं उनके जीवन के विषय में अनभिज्ञ था। परन्तु यह जानने के लिये कि वे क्या थीं, मुझे उनके जीवन के बारे में विस्तार से जानने की आवश्यकता नहीं थी। मैं उनके कार्य के माध्यम से उन्हें पहले से ही जानता था।

सुबह की सैर के समय मेरा अभिवादन करने वाले संन्यासियों एवं संन्यासिनियों के प्रसन्न, स्नेहिल चेहरों में मैंने उनकी आत्मा को जाना था। सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप द्वारा प्रकाशित पुस्तकों एवं कॅलेंडरों की सुन्दरता में मैंने उन्हें जाना था। सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप के उद्यानों का नज़ारा लेते वहाँ सैर करते हुए मैंने उन्हें जाना था; और वहाँ के मनोहर लॉनों पर अपने कुत्ते के साथ खेलते हुए मैंने उन्हें जाना था। वहाँ के उपवन में ध्यान के शान्त पलों में जब भी एक अनगढ़ मूक प्रार्थना द्वारा मैं उनकी अदृश्य उपस्थिति का अभिवादन करता, तब मैंने उन्हें जाना था।

दया माताजी! माउण्ट वॉशिंग्टन के हम पड़ोसी आपको शायद ही जानते थे—लेकिन फिर भी हम आपको जानते थे। हम आपको जानते थे आपके समुदाय की शान्तिपूर्ण आभा से, और उस विशेष ऊर्जा से जो हमें महसूस होती है जब हम आपके उद्यानों में आपके अनुयायियों के आस-पास होते हैं। हमारी पड़ोसी बनने के लिये धन्यवाद; माउण्ट वॉशिंग्टन को अपना घर बनाने के लिये धन्यवाद; इस संसार को दिये आपके योगदान के लिये धन्यवाद। आपका जीवन-कार्य स्वतः बोलता है।

शेयर करें

This site is registered on Toolset.com as a development site.