गुरु पूर्णिमा—2022

इस वर्ष 13 जुलाई को मनाए जा रहे गुरु पूर्णिमा पर्व पर हमारे आदरणीय अध्यक्ष का विशेष सदेश

“गुरु-शिष्य के बीच का सम्बन्ध मित्रता में प्रेम की सबसे बड़ी अभिक्ति है, यह नि:शर्त दिव्य मित्रता है, जिसमें दोनों का एक ही साझा लक्ष्य होता है: अन्य किसी भी वस्तु से बढ़कर ईश्वर से प्रेम की इच्छा।

— श्री श्री परमहंस योगानन्द

प्रियजनों,

इस पवित्र दिवस पर मैं आप सब के साथ मिलकर अपने प्रिय गुरुदेव से हृदय, मन, तथा आत्मा के स्तर पर होने वाली उस आंतरिक समस्वरता के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूँ जो हमारे आध्यात्मिक जीवन की पवित्र नींव है। इस अवसर पर तथा सदैव, उनके इन दिव्य वचनों को अपने हृदयों में सँजोकर रखें : “अज्ञात मैं तुम्हारे साथ चलूँगा, और अपने अदृश्य हाथों से तुम्हारी रक्षा करूँगा।” गुरुदेव में अपनी आस्था के द्वारा, तथा उनके द्वारा दी गई साधना के निष्ठापूर्ण अभ्यास से, आप दिव्य लक्ष्य की ओर निरंतर तथा निश्चित रूप से बढ़ेंगे।

परिपूर्ण, ईश्वर से एकाकार गुरु में ईश्वर के ये सभी गुण विद्यमान होते हैं – सर्वज्ञता, सर्वशक्तिमत्ता, तथा सर्वव्यापकता – अतः जब भी हम सहायता, सुरक्षा, मार्गदर्शन, तथा प्रेम के लिए गुरु से गुहार लगाते हैं, तब हम यह जान सकते हैं कि वे हमारी आत्मा की गहरी पुकारों का प्रत्युत्तर देने हेतु सर्वत्र उपस्थित हैं।

निरंतर प्रेम व आशीर्वादों के साथ,

स्वामी चिदानन्द गिरि

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