चक्रवात फणी के अवसर पर स्वामी चिदानन्द गिरि का संदेश

प्रिय आत्मन्,

मई 2019

मेरा हृदय उन सभी के लिए अत्यधिक द्रवित है जो पुरी तथा आसपास के क्षेत्रों सहित, पूरे ओडिशा में चक्रवात फणी के कारण हुए विध्वंस से प्रभावित हुए हैं। मैं तथा गुरुदेव श्री श्री परमहंस योगानन्द के आश्रमों में रहने वाले सभी संन्यासी और संन्यासिनियाँ भी उन सब पीड़ितों के लिए गहन प्रार्थना कर रहे हैं।

जैसा कि आप जानते हैं, गुरुदेव का पुरी के साथ विशेष संबंध रहा है, क्योंकि उन्होंने यहाँ अपने पूज्य गुरु, स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी से प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए लम्बा समय व्यतीत किया था। निश्चित रूप से ये दोनों महान् अवतार, अपनी सर्वज्ञ चेतना में उन सभी के लिए अपने आशीर्वाद भेज रहे हैं जो इस विपदा से प्रभावित हुए हैं, तथा उन सब के लिए भी जो इन प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास कार्यों में लगे हुए हैं। और राहत कार्यों में योगदा सत्संग सोसाइटी की सक्रिय भागीदारी देखकर, तथा यह देखकर वे कितने प्रसन्न होंगे कि वाईएसएस एवं एसआरएफ़ सदस्य भी पुरी एवं आसपास के क्षेत्रों में सभी ज़रूरतमंदों के लिए प्रार्थनायें कर रहे हैं। यद्यपि उनके लिए यह अत्यंत कठिन समय है, फिर भी इस तथ्य को जानकर उनका बोझ थोड़ा हल्का हो सकता है कि भारत एवं विश्व भर में संवेदनशील आत्मायें उनके इस कष्ट का अनुभव कर रही हैं और ईश्वर से सहायता की याचना कर रही हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि सभी पीड़ित लोगों को शक्ति प्रदान करें, परिस्थितियाँ ठीक होने तक उन्हें आशा और विश्वास प्रदान करें तथा उन्हें अपने सर्व-आरोग्यकारी, एवं आश्वासनकारी प्रेम के आलिंगन में ले लें।

गुरुजी हमें सिखाते हैं कि हमारी बाहरी परिस्थितियाँ जो भी हों, माया के इस जगत् में जीवन के तूफ़ानों से आश्रय पाने के लिए ईश्वर ही सबसे सुरक्षित स्वर्ग हैं। जब हम विश्वास एवं भक्ति के साथ उनकी ओर मुड़ते हैं, तो हम अपनी इच्छा-शक्ति को सक्रिय करते हुए और इसे ब्रह्माण्ड को अस्तित्व में लाने वाली ब्रह्माण्डीय शक्ति के साथ जोड़ते हुए अँधकार से प्रकाश की ओर मुड़ रहे होते हैं। ईश्वर ने हममें से प्रत्येक को अपनी छवि में बनाया है और हमारी आत्माओं को अपनी सृजनात्मक शक्ति एवं अपने सभी दिव्य गुणों से सम्पन्न किया है। यदि हम इस सत्य को याद रखें कि हममें से प्रत्येक में एक सफ़ल आध्यात्मिक विजेता बनने की क्षमता है, तो हमें कुछ भी विचलित नहीं कर सकता — फिर माया हमारे मार्ग में चाहे जैसे अवरोध क्यों न उत्पन्न करे। जब हम ईश्वर को दृढ़ता से थामे रहते हैं और अपने दैनिक जीवन में उनके दिव्य उपहारों का प्रयोग करते हैं, तो उनकी शक्ति हमारे प्रयासों को दृढ़ता प्रदान करती है। और जब हम दूसरों के कष्टों के प्रति सहानुभूति रखते हुए उनके लिए प्रार्थना करते हैं, तो हम अपना स्वयं का ध्यान रखने के सीमित दैनिक दायरे से परे सार्वभौमिक प्रेम एवं करुणा की उस विस्तृत चेतना में उठा दिए जाते हैं, जिसमें महापुरुष रहते हैं। ऐसा करने से हमारे हृदय ईश्वर के प्रेम को हमारे माध्यम से प्रवाहित होने देने के लिए और अधिक खुल जाते हैं, तथा विश्व में अधिक दयालुता एवं बंधुत्व की नींव रखते हैं।

मेरी प्रार्थना है कि संयुक्त प्रार्थनाओं तथा अनेक लोगों द्वारा निरंतर किये जा रहे सेवा कार्यों के द्वारा आहूत अनन्त ईश्वर की उपस्थिति उन सभी के लिए प्रोत्साहन एवं सहायता की एक मूर्त शक्ति बने जिन्हें आने वाले दिनों और महीनों में अपने जीवन का पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता है।

ईश्वर और गुरु आप सबको आशीर्वाद प्रदान करें,
स्वामी चिदानन्द गिरि

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