वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष स्वामी चिदानंद गिरि का गुरु पूर्णिमा पर संदेश – 2019

 

प्रिय दिव्य आत्मन्,

गुरु पूर्णिमा, भारत और विश्व भर में ऐसी आत्माओं के साथ सम्मिलित होने का एक पावन अवसर है, जिन्होंने गुरु को श्रद्धांजलि देने की परंपरा बनाए रखी है। गुरु, हमारी आत्माओं के प्राकृतिक तेज को ढँकने वाले माया के “अँधकार के विनाशक” होते हैं। आइये, हमारे जीवन में असंख्य आशीर्वादों की वर्षा करने वाले अपने प्रिय गुरु श्री श्री परमहंस योगानन्द के प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित करें; और उनके द्वारा दी गई साधना का अधिकाधिक उत्साह के साथ अनुसरण करने का नए सिरे से संकल्प लें।

गुरुजी की सर्वव्यापक चेतना में उनके और हमारे बीच कोई अवरोध नहीं है। उन्होंने अपना भौतिक शरीर छोड़कर जाने के बाद भी अपने शिष्यों की अनन्त सुरक्षा एवं मार्गदर्शन करने का आश्वाशन दिया है: “मैं आप में से प्रत्येक पर हमेशा अपनी दृष्टि रखूंगा, और जब भी कोई भक्त अपनी आत्मा की मौन गहराइयों में मेरा स्मरण करेगा, वह जान जायेगा कि मैं उसके निकट हूँ।” जब आप इस विचार के साथ उनके पाठों और अन्य शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं कि “वे मुझसे बात कर रहे हैं,” तो वे शब्द उनके ईश-चैतन्य की रूपान्तरकारी शक्ति से संतृप्त होकर आपके लिए जीवन्त हो उठते हैं। जब आपको अपनी किसी समस्या को सुलझाना हो, और आप स्वयं को उनकी शान्ति की आभा से घेर लें तथा उनसे मार्गदर्शन माँगें, तो वे अपने मार्ग को अधिक स्पष्टता से देखने में आपकी सहायता करेंगे। यदि आप कोई ग़लती करें या अप्रिय परिस्थितियों का सामना कर रहे हों, अपने अन्तर् में उनसे पूछें: “आप मुझे क्या सिखाना चाहते हैं?” उनके मार्गदर्शन के प्रति ग्रहणशील बनने से आपको अपनी आत्मा की प्रगति में तेजी लाने के लिए ज्ञान के अनमोल रत्न प्राप्त होंगे।

गुरु के साथ गहनतम समस्वरता ध्यान के द्वारा आती है। गुरुजी के चित्र के सामने ध्यान के लिए बैठते ही, उनकी जीवन्त उपस्थिति अनुभव कीजिये, ताकि उनकी उच्चतर चेतना एवं भक्ति की शक्ति आपके प्रयासों को दृढ़ता प्रदान कर सके। उनके आशीर्वादों से युक्त, वाइएसएस/एसआरएफ़ की पवित्र ध्यान-प्रविधियों के अभ्यास से, आन्तरिक चंचलता धीरे-धीरे समाप्त हो जायेगी। और अपनी आत्मा के मौन मन्दिर में आप अधिक स्पष्टता से उनके अनन्त प्रेम के आलिंगन का अनुभव करेंगे, जो कि आपको अपने भीतर के दिव्य गुणों की अभिव्यक्ति के लिए हमेशा प्रोत्साहित करेगा और आपकी सहायता करेगा।

ईश्वर एवं गुरुदेव का प्रेम और आशीर्वाद सदा आपके साथ रहे,

स्वामी चिदानन्द गिरि

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