श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि का सन्देश

नवम्बर 2021

प्रिय आत्मन् :

परमहंस योगानंद के अनुयायियों और मित्रों के हमारे प्रिय आध्यात्मिक परिवार को प्रेमपूर्ण शुभकामनायें! हमारे गुरु की ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी  के इस 75वें वर्ष पर, मेरा ह्रदय उन आजीवन आशीर्वादों के लिये कृतज्ञता से पूर्ण है जो इस अद्भुत पुस्तक ने मेरे और विश्व भर के असंख्य लोगों के जीवन में प्रदान किये हैं। आप में से अनेक लोगों की भांति ही, इस आटोबायोग्राफी  ने ही मुझे सबसे पहले परमहंस योगानंद की क्रियायोग शिक्षाओं से परिचित कराया। इतने वर्षों के बाद पीछे मुड़कर देखने पर, मुझे उन “अकल्पित-संभावनाओं” के प्रति अपनी आत्मा के जागरण का रोमांच याद आता है जो लेखक एवं उनकी गुरु परंपरा की ईश्वर-संतृप्त चेतना से सीधे मेरे ह्रदय और मस्तिष्क में पन्नों को प्रवाहित करती प्रतीत हुईं।

उस प्रथम पठन के बाद असंख्य जीवन-परिवर्तनकारी प्रभावों में से, निश्चित रूप से सबसे अधिक हृदयस्पर्शी है विश्व भर के — आप सभी हजारों लोगों के साथ सत्संग (दिव्य संगति) का आनंद, जो इसी तरह रूपांतरित हुए हैं! जब भी मुझे इस पथ के भक्तों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त होता है, तो मैं उस शक्ति के प्रति नए सिरे से चकित होता हूँ जिसका हमारे गुरु ने इतने लोगों के जीवन में संचार किया है—इस पुस्तक के माध्यम से, और उस प्रेरणा और निर्देश के अंतहीन प्रवाह के माध्यम से जो हमें इस परिचय के बाद पता चलता है — ईश्वरीय स्रोत से उनके माध्यम से प्रवाहित हुए हज़ारों पृष्ठों के व्याख्यान और लेख, तथा उनके एसआरएफ़/वाईएसएस पाठों  के माध्यम से प्रदान की गईं क्रियायोग ध्यान के विज्ञान की मुक्तिदायी प्रविधियाँ। इसे देखने के लिए, व्यक्ति को बस, क्रियायोग पथ के निष्ठावान भक्तों की आंखों और चेहरों को देखना होगा — जो ध्यान का अभ्यास करते हैं; जो शिक्षाओं के लिए सिर्फ एक दार्शनिक या प्रेरक दृष्टिकोण से परे जाते हैं और ईश्वर को जानने के लिए दैनिक अनुशासन के रूप में जो उन्होंने दिया है उसका वास्तव में उपयोग करते हैं, एक दैनिक साधना। आपके चेहरे, आपकी आंखें, भीतर से प्रकाश से जगमगाती हैं। यही इस क्रियायोग विज्ञान की शक्ति है। हमारे गुरुदेव ने हमें कितना बड़ा खजाना, कितना आजीवन आशीर्वाद और शक्ति, उत्थान, तथा परमात्मा से जुड़ाव का स्रोत दिया है!

यहां परमहंसजी के अमेरिका के आश्रमों में हम शीघ्र ही राष्ट्रीय धन्यवाद दिवस मनाएंगे। हमारे गुरु ने इस उत्सव में निहित आध्यात्मिक उद्देश्य की प्रशंसा की है, विशेष रूप से हमारे जीवन में प्रकट होने वाले समस्त कल्याण के लिए सचेत रूप से आभार प्रकट करने और भगवान को धन्यवाद देने के लिए समय निकालने की प्रथा की। अनंत परमात्मा उन लोगों के लिए अज्ञात और रहस्यमय बने रहते हैं जो अपने सृष्टा के साथ व्यक्तिगत संबंध विकसित नहीं करते हैं; परन्तु जो लोग ईश्वर की उपस्थिति का अभ्यास करते हैं — केवल विशेष छुट्टियों पर ही नहीं बल्कि दिन-प्रतिदिन, वर्ष-प्रतिवर्ष निरंतर भक्तिमय जागरूकता के रूप में — उनके लिये वे प्रिय परमात्मा सुरक्षा, मार्गदर्शन, प्रेम और प्रेरणा के एक वास्तविक दाता बन जाते हैं जो हमारी आत्माओं का हमेशा वैसा पोषण करते हैं जैसा और कुछ नहीं कर सकता।

वर्षों पूर्व हमारी स्वर्गीय श्रद्धेय संघमाता श्री दया माता ने, थैंक्सगिविंग के इस अवसर पर परमहंस योगानन्दजी के अनुयायियों को संबोधित करते हुए ये शब्द कहे थे, जिन्हें मुझे लगता है कि आप सब भी इस अवसर पर विशेष रूप से अर्थपूर्ण पाएंगे :

“हम सभी के सृष्टा और पालनकर्ता को याद करने के लिए समर्पित इस दिन पर, मैं प्रार्थना करती हूं कि आप जीवन की अक्सर उथल-पुथल वाली सतह के नीचे, अपने परमपिता, माता, सखा के परिवर्तनहीन, स्थिर आश्वासन की नए सिरे से खोज करें। इस सांसारिक नाटक के लगातार बदलते दृश्यों और अपनी सृष्टि की चकाचौंध भरी विविधता के पीछे ईश्वर ने अपनी सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमानता को ढँक दिया है। फिर भी वे हमेशा हमारी चेतना के द्वार पर दस्तक देते हैं। यदि हमारी आत्माओं में उनकी अडिग उपस्थिति नहीं, तो और क्या हममें कठिनाई और असुरक्षा के समय में मजबूत होने का विश्वास और साहस जगाता है? यदि हमारे भीतर फुसफुसाता हुआ उनका करुणामय प्रेम नहीं, तो और क्या हमारे पास जो कुछ है उसे दूसरों के साथ बांटने की इच्छा जगाता है? क्यों हमारे ह्रदय सूर्यास्त की भव्यता से प्रसन्न होते हैं, या शरद ऋतु के पत्ते के सुंदर रंग और जटिल रचना से प्रभावित होते हैं? यह उनकी सुंदरता ही है जिसे हमारी आत्मा इस दुनिया में उत्थान और प्रेरणा देने वाली प्रत्येक वस्तु में देखती है। जब हम हर शुद्ध भावना, हर नेक कार्य, हर अच्छा जो हम उनके स्रोत से प्राप्त करते हैं, का पालन करते हैं, हम उनके छिपने का स्थान पाते हैं।

“स्मरण के सरल अभ्यास से, आप अपनी चेतना को उनके पोषक प्रेम और सुरक्षा के निरंतर आशीर्वाद में स्थापित कर सकते हैं।”

प्रियजनों, ईश्वर जो एक योगी की आत्मकथा  के माध्यम से हम हजारों लोगों के लिए इतने वास्तविक हो गए हैं — वह ईश्वर जिनका प्रेम और परिवर्तनकारी उपस्थिति उस प्रत्येक बार अपना नवीकरण करती है जब भी हम उन दिव्य पृष्ठों को पुन: पढ़ते हैं, और विशेष रूप से तब जब हम क्रियायोग विज्ञान का अभ्यास करते हैं, जिसके लिये वह पुस्तक विश्वव्यापी अग्रदूत थी — आपको अभी और हमेशा प्रकाश, आनंद, और ईश्वर की अमर संतान के रूप में आपकी अपनी दिव्यता का आश्वासन प्रदान करें।

ईश्वर एवं गुरु में निरंतर आशीर्वादों के साथ

स्वामी चिदानन्द गिरि

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