यूक्रेन में युद्ध पर स्वामी चिदानन्दजी का सन्देश

एसआरएफ़/वाईएसएस के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्दजी ने यह संदेश परमहंस योगानन्दजी के सभी अनुयायियों और मित्रों के साथ साझा करने के लिये कहा है:
“यूक्रेन में युद्ध को लेकर दुनिया भर में गंभीर चिंता के इस समय में, मैं सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप और योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया के सभी सदस्यों और मित्रों से आग्रह करता हूँ कि वे उन सभी के लिए गहराई से प्रार्थना करते रहें जिनके जीवन, परिवार और स्वास्थ्य खतरे में हैं—तथा विश्व शान्ति एवं सद्भाव के लिए भी। मानव जाति एक परिवार है, और एक राष्ट्र के विरुद्ध आक्रामक युद्ध के कार्य अंततः हम सभी को प्रभावित करते हैं। कृपया मेरे साथ और परमहंस योगानन्दजी के आश्रमों के संन्यासियों के साथ मिलकर यह विशेष प्रार्थना करें कि ईश्वर का प्रकाश, जो कि हमारे वैश्विक परिवार के सभी सदस्यों की आत्माओं, विवेक और सद्भावना के माध्यम से कार्य कर रहा है, निर्दोष लोगों के चारों ओर सुरक्षा का एक शक्तिशाली कवच बना दे, तथा इस हिंसा और विनाश में फूटने वाले मानव स्वभाव के अंधकारमय आवेगों की अज्ञानपूर्ण लिप्तता के लिये एक आरोग्यकारी प्रतिबल उत्पन्न कर दे।
“ध्यान में ईश्वर संपर्क से उत्पन्न हुए एकाग्रचित्त प्रार्थना, प्रेम, और ईश्वर से समस्वर विचार एवं ऊर्जा क्षति झेल रहे लोगों के लिए सुरक्षा, साहस और आंतरिक बल तथा राष्ट्रों के नेताओं के लिए ज्ञान और सही समझ उत्पन्न करने में सहायता कर सकते हैं। आइए हम सब मिलकर वैश्विक घटनाक्रमों के वर्तमान संकटपूर्ण समय में इस शक्तिशाली हस्तक्षेप का उपयोग करें—उन सभी के लिए जो वर्तमान संघर्ष से पीड़ित हैं, तथा सार्वभौमिक आध्यात्मिक सिद्धांतों और जीवन जीने के ईश्वरीय तरीकों के प्रति वैश्विक परिवार की निरंतर जागृति के लिए, जो कि स्थायी शांति और सद्भाव लाने का एकमात्र स्थायी मार्ग हैं।”
परमहंस योगानन्दजी ने एक आरोग्यकारी प्रविधि सिखाई जिसका अभ्यास वैयक्तिक तथा सामूहिक ध्यान के अंत में किया जाता है। हम आपको एक संक्षिप्त वीडियो के माध्यम से वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द गिरि के साथ इस अभ्यास में भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिसमें वह विश्व में स्वास्थ्य और शांति लाने हेतु प्रार्थना की असाधारण शक्ति के बारे में बताएंगे ।

परमहंसजी का मानवता के उत्थान हेतु दूरदर्शितापूर्ण ज्ञान

आध्यात्मिक पथ पर परमहंस योगानन्दजी के दूरदर्शी ज्ञान को भी हम आपके साथ साझा करना चाहते हैं, जिसे हम सभी विश्व एकता की नींव बनाने में मदद के लिए उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि मानवता अधिक समझ, सहयोग और सुरक्षा की ओर विकसित हो रही है।
Paramahansa-Yoganandas-Far-Seeing-Wisdom-for-Humanity
परमहंस योगानन्दजी द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध के समय दिए गए सत्संगों और लेखों से :
लोग इस युद्ध से तकनीक के दुरूपयोग के विनाशकारी परिणामों को जानेंगे।… इसके खत्म होने के बाद, विश्व तबाही का इतना डर ​​होगा कि अगर कोई युद्ध शुरू करने की कोशिश करेगा, तो बाकी दुनिया उस राष्ट्र पर टूट पड़ेगी। मैं आपको अपने समय से बहुत आगे की बातें बता रहा हूं।
मेरा मानना ​​है कि अगर दुनिया के हर नागरिक को ईश्वर के साथ समस्वर होना सिखाया जाए (केवल उन्हें बौद्धिक रूप से जानना नहीं), तो शांति स्थापित हो सकती है; इससे पहले नहीं। जब ध्यान में दृढ़तापूर्वक प्रयास द्वारा आप ईश्वर को उनके साथ तादात्म्यता के माध्यम से अनुभव करते हैं, तो आपका हृदय पूरी मानवता को गले लगाने के लिए तैयार रहता है।
युद्धों को कम करने के लिए दुनिया को अधिक से अधिक आध्यात्मिक बनना चाहिए।… प्रेम, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, शांति, आनंद, साझा करने मात्र से ही दुनिया में शांति आ सकती है।
संकल्प लें कि आप दुनिया को अपने राष्ट्र के जैसा प्रेम करेंगे, और आप अपने राष्ट्र से अपने परिवार की तरह प्रेम करेंगे। इस समझ द्वारा आप ज्ञान की अविनाशी नींव पर एक विश्व परिवार स्थापित करने में सहायक होंगे।
उनका ध्यान करने के लिए प्रतिदिन कुछ समय निर्धारित करें। जब आप ईश्वर के साथ एकात्म होंगे, तो आप सभी के प्रति वैसा महसूस करेंगे जैसा अपने प्रति करते हैं। कोई मुझे कभी भी यह महसूस नहीं करा सकता कि वह मेरा अपना नहीं है। सभी मनुष्य परमेश्वर की संतान हैं, और वह मेरे पिता हैं।
महापुरुष हमारे आदर्श हैं। हालांकि उनके शरीर सीमित थे, परन्तु उन्होंने अपने अंतर् में यह बोध किया कि वे अनंत महासागर का हिस्सा थे; कि सभी वैयक्तिक रूप ब्रह्मांडीय सागर की लहरें हैं। इस जगत् में हम स्वयं को एक छोटे से परिवार में सीमित कर लेते हैं। जब हम अपने पड़ोसियों से प्रेम करते हैं, तो हम बड़े हो जाते हैं। जब हम अपने देश से प्रेम करते हैं, तो हम और भी बड़े हो जाते हैं। जब हम सभी राष्ट्रों से प्रेम करते हैं, तो हम और भी अधिक बड़े हो जाते हैं। और जब हम परलोक में, या यहाँ शरीर में होते हुए भी गहरे ध्यान में ईश्वर के साथ एक होते हैं, तो हम वास्तव में यह बोध करते हैं कि सागर ही लहर है, और लहर ही सागर है।
इस जीवन की छाया के ठीक नीचे ईश्वर का चमत्कारिक प्रकाश है। ब्रह्मांड उनकी उपस्थिति का एक विशाल मंदिर है। जब आप ध्यान करते हैं, तो आप पाएंगे कि हर जगह उनकी ओर जाने के द्वार खुल रहे हैं। जब आप उनके साथ संवाद करते हैं, तो दुनिया के सारे विध्वंस भी उस आनंद और शांति को नहीं छीन सकते।
अभ्यास के लिये प्रतिज्ञापन: “जीवन और मृत्यु में, रोग, अकाल, महामारी, या गरीबी में मैं सदा आपसे लिपटा रहूं। मुझे यह बोध करने में सहायता करें कि मैं अमर आत्मा हूं, जो बचपन, युवावस्था, उम्र और विश्व की उथल-पुथल से अछूती है।”

हमारी वेबसाइट पर अतिरिक्त संसाधन

वेबपेज “इन चुनौती पूर्ण समय के लिए आध्यात्मिक प्रकाश” पर आपको परमहंस योगानन्द, स्वामी चिदानन्दजी, और पिछले वाईएसएस/एसआरएफ़ अध्यक्षों द्वारा प्रदत्त डर और नकारात्मकता पर काबू पाने और दुनिया की स्थिति पर अपने लिए एक आशावादी दृष्टिकोण कैसे स्थापित करें, संबंधी व्यावहारिक संसाधन मिलेंगे। कृपया वाईएसएस/एसआरएफ़ के विश्वव्यापी पार्थना मंडल में भाग लेने पर भी विचार करें, जोकि परमहंस योगानन्द द्वारा शुरू किया गया एक सामूहिक आध्यात्मिक प्रयास है।

इन चुनौती पूर्ण समय के लिए आध्यात्मिक प्रकाश

विश्वव्यापी प्रार्थना मंडल

प्रार्थनाएं और प्रतिज्ञापन

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