मेरे अज्ञानपूर्ण बाह्य जीवन के सभी आवरण मेरी क्राइस्ट जागृति के प्रकाश में जल गए हैं, और मैं शिशु जीसस की प्रज्ञा के समक्ष हूँ जो गुलाब की पंखुड़ियों, प्रकाश की बुनावट और सभी सच्चे हृदयों के प्रेम के विचारों के हिंडोले में उपस्थित है।

— परमहंस योगानन्द

परमहंस योगानन्दजी ने क्रिसमस पर्व के दौरान पूर्ण-दिवसीय ध्यान-सत्र के आयोजन की प्रथा प्रारंभ की थी, ताकि क्राइस्ट चैतन्य (कूटस्थ चैतन्य ) के साथ समन्वय को बल मिले, जिसे उन्होंने क्रिसमस के उत्सव को मनाने का सही ढंग बताया।

इसी परंपरा को जारी रखते हुए, वाईएसएस संन्यासियों ने रविवार, 19 दिसम्बर को सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार) 8 घंटे के ध्यान-सत्र का संचालन किया।

इस कार्यक्रम का संचालन दो सत्रों में किया गया :

  • सत्र I : सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार)
  • अंतराल : दोपहर 12:00 बजे से 12:30 बजे तक (भारतीय समयानुसार)
  • सत्र II : दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार)