मेरे जाने के बाद, मेरी शिक्षाएं ही गुरु होंगीं।… शिक्षाओं के माध्यम से तुम मुझसे और उन महान गुरुओं से जिन्होंने मुझे भेजा है, समस्वर रहोगे।

— परमहंस योगानन्द

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, यह परंपरा है कि हम अपने गुरुओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करें, विशेषत: हमारे परम प्रिय गुरुदेव परमहंस योगानन्दजी को, जिन्होंने हमें आत्मसाक्षात्कार के इस दिव्य मार्ग के अनुसरण को प्रेरित किया है।

यद्यपि हम अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए आश्रमों और ध्यान केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, फिर भी हम अपने घरों में बैठकर अपने हृदय की वेदी पर उनका आह्वान कर उनके शक्तिशाली आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

इस वर्ष योगदा सत्संग सोसाइटी ने गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में वाईएसएस संन्यासियों द्वारा संचालित हिंदी एवं अंग्रेज़ी में दो ध्यान सत्रों का आयोजन किया। प्रत्येक सत्र में चैंटिंग की अवधि, 45 मिनट के लिए ध्यान की अवधि और 45 मिनट के लिए एक प्रेरक सत्संग शामिल था।

ईश्वर करे कि हम सभी इस गुरु पूर्णिमा दिवस पर, गुरुओं की जीवंत उपस्थिति को अनुभव करें!

सुबह का ध्यान – अंग्रेज़ी

10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार)

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शाम का ध्यान – हिंदी

6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक (भारतीय समयानुसार)

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