जो व्यक्ति मुझे सर्वत्र देखता है तथा प्रत्येक वस्तु को मुझमें देखता है, मैं उसकी दृष्टि से कभी ओझल नहीं होता, न ही वह मेरी दृष्टि से कभी ओझल होता है।

— ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता, श्लोक 6:30

कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर, विश्वभर के भक्तों के साथ मिलकर, दिव्य प्रेम के इस राजसी अवतार के साथ अपने मन और हृदय को समस्वर करने का एक सुंदर अवसर है।

भगवान कृष्ण के जन्म की पावन स्मृति में सोमवार, 30 अगस्त को वाईएसएस संन्यासियों द्वारा विशेष ऑनलाइन ध्यान-सत्रों का  संचालन किया गया। दो अलग-अलग ऑनलाइन ध्यान-सत्र आयोजित किये गए। दोनों सत्रों में अंग्रेजी और हिंदी में पाठन, भक्तिमय चैंटिंग और ध्यान की अवधि शामिल थे।

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