प्रत्येक भक्त को, ईश्वरीय इच्छाशक्ति के अपने बोध को, प्रार्थनाओं, ध्यान में ईश-सम्पर्क द्वारा, तथा आध्यात्मिक साहचर्य द्वारा सशक्त बनाना चाहिए।

— परमहंस योगानन्द

जून मास के छ: घण्टे के दीर्घकालिक ध्यान का संचालन वाईएसएस संन्यासियों द्वारा अंग्रेज़ी व हिंदी में किया गया। ध्यान-सत्र का आरंभ शक्ति-संचार व्यायाम से हुआ। फिर प्रेरक पाठन, चैंटिंग की अवधि और ध्यान हुआ। ध्यान-सत्र का समापन गुरुजी की आरोग्यकारी प्रविधि व समापन प्रार्थना से किया गया।