हे परमपिता, हमें इस नववर्ष में सशक्त बनायें, हम सदैव आपकी सतत उपस्थिति से मार्गदर्शित हों ताकि हम देह, मन और आत्मा में आपके जीवन, स्वास्थ्य, समृद्धि और प्रसन्नता को परावर्तित करें। आपकी संतान होने के नाते हम आपकी तरह परिपूर्ण बनें। ओम्, शांति, ओम्।

— परमहंस योगानन्द

परमहंस योगानन्दजी ने कहा कि नववर्ष का प्रारंभ एक उत्कृष्ट समय होता है जिसमें हम चिन्तन करें और अपने उचित लक्ष्यों और आकांक्षाओं को प्रकट करने के लिए नए संकल्प लें। इस प्रयास में हमारी सहायता के लिए, उन्होंने ध्यान के माध्यम से नववर्ष का प्रारंभ करने की परंपरा शुरू की।

नववर्ष के उदय पर 31 दिसम्बर को  वाईएसएस संन्यासी  एक विशेष ध्यान का संचालन किया गया।